पुतिन का तानाशाही रवैया; पुतिन का फरमान- हमला, घुसपैठ या जंग जैसे लफ्जों का इस्तेमाल न करे मीडिया, नाफरमानी पर जेल और जुर्माना Featured

बोलता गांव डेस्क।। 

दुनिया का अमन चैन छीन लेने वाले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने एक और बड़ी हरकत की है और इसे सीधे तौर पर तानाशाही कहा जा सकता है। रूस सरकार के अंडर में काम करने वाली मीडिया रेग्युलेटरी डिवीजन ने शनिवार दोपहर एक आदेश जारी किया।

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इसमें कहा गया है- कोई भी मीडिया हाउस इस दौर में जंग, हमला या घुसपैठ जैसे शब्दों का इस्तेमाल न करे। अगर इस आदेश को नहीं माना गया तो इससे जुड़े पत्रकार को सजा हो सकती है और मीडिया हाउस बंद किया जा सकता है। इसके साथ ही तगड़ा जुर्माना लगना भी तय है।

 

बेखौफ था मीडिया

हकीकत तो यह है कि पुतिन ने फरवरी के दूसरे हफ्ते से ही मीडिया पर नकेल कसना शुरू कर दिया था। इसके तहत एडवाइजरीस जारी की जा रहीं थीं। अब जंग शुरू हो चुकी है और रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है। पुतिन की दिक्कत यह है कि देश में उनकी सनक और जंगी जुनून का कई लोग खुलकर विरोध कर रहे हैं। यही वजह है कि वो इन आवाजों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। मेन स्ट्रीम मीडिया पुतिन के विरोधियों को काफी कवरेज दे रहा है।

 

अब क्या होगा

‘मॉस्को टाइम्स’ की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक- रूस सरकार को लगने लगा है कि उसके कदमों का घर में ही विरोध हो रहा है। लिहाजा अब इन आवाजों को कुचलने की तैयारी की गई है। मीडिया रेग्युलेटर ने रूसी भाषा में आदेश जारी कर दिया है।

 

इसके तहत हमला, जंग और घुसपैठ (assault, invasion, declaration of war) जैसे शब्दों का मीडिया रिपोर्टिंग में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। उल्लंघन पर सजा, मीडिया ब्लॉकिंग और जुर्माना होगा। आदेश में कहा गया- कुछ इंडिपेंडेंट मीडिया हाउस गलत खबरें दे रहे हैं। वो दावा कर रहे हैं कि रूसी सेना ने यूक्रेन के शहरों पर हमले किए हैं।

 

सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर

अपुष्ट खबरों में कहा गया है कि पुतिन के आदेश पर देश की सायबर सिक्योरिटी एजेंसी सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी नजर रख रही है। खासतौर पर उन अकाउंट्स को मॉनिटर किया जा रहा है जो पुतिन का विरोध कर रहे हैं। गाइडलाइन्स न मानने वाले लोगों पर 60 हजार रूबल का जुर्माना भी किया जा रहा है।

 

मीडिया हाउसेज से कहा गया है कि वो सिर्फ वो जानकारी लोगों तक पहुंचाएं जो सरकार की तरफ से जारी की जा रही है। यह कदम उठाने की एक वजह यह भी है कि कुछ मीडिया आउटलेट्स ने यह दावा किया था कि यूक्रेन की फौज ने रूस को बहुत गंभीर नुकसान पहुंचाया है और रूसी सैनिक लगातार मारे जा रहे हैं।

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