खेती-किसानी: साेलर पंप लगने से सरसाें, गेहूं, उड़द मूंगफली और सब्जी का रकबा बढ़ा Featured

खेती-किसानी: साेलर पंप लगने से सरसाें, गेहूं, उड़द मूंगफली और सब्जी का रकबा बढ़ा News credit Dainik Bhaskar

बोलता गांव डेस्क।।

 

सौर सुजला योजना अंतर्गत जिला जशपुर में अब तक 11114 हितग्राहियों के यहां कुल 11114 नग सिंचाई के लिए सोलर पंप लगाए जा चुके हैं। साेलर पंप लगने से सरसाें, गेहूं, उड़द, मूंगफली और सब्जियों का रकबा बढ़ा है। योजना उन सभी कृषकों के लिए है, जो जल स्त्रोत होने पर भी खेतों में सिंचाई के लिए किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं कर पाते थे। इससे जिले में बागवानी की खेती का रकबा बढ़ा है। जिले में पिछले तीन सालों में लगभग दो हजार एकड़ नाशपाती के बागानों में वृद्धि दर्ज की गई है।

 

जिले के सिंचित इलाके में स्ट्राबेरी की खेती शुरू की है, जो अब किसानों के लिए अच्छी आमदनी का माध्यम बन रहा है। यानी अब जशपुर से स्ट्रॉबेरी की सप्लाई अन्य राज्यों में की जा रही है। जशपुर में उपजने वाला टाउ तिब्बत, चीन तक निर्यात होती है। इस बार करीब 12 करोड़ से भी अधिक की फसल हुई है। जिले के पाठ क्षेत्र न केवल उपजाऊ जमीन से यहां के किसान अब उन्नत खेती की ओर अग्रसर हो गए हैं, बल्कि टमाटर,आलू, सरसों, रामतिल, मिर्ची के साथ-साथ टाउ की भी फसल लेने लगे हैं। इससे इस क्षेत्र के किसानों की दशा और दिशा दोनों बदलने लगी है।

 

मोटे अनाज की खेती कर रहे किसान

जिले में किसान अब बाज़ार की मांग के हिसाब से मोटा अनाज की खेती कर रहे हैं। पहले जिले में जनजाति संस्कृति में मोटे आनाज की खेती बहुत मात्रा में होती थी। समय के साथ किसान धान और गेंहू की फसल लगाने लगे। जिले ज्वार, रागी, सावन, कांगनी, चीना, कोदो, कुटकी और कुट्टू जैसे परम्परागत आनाजो की मांग बढ़ी है। मोटा अनाज मोटापा कम करने के साथ-साथ डायबिटीज, हाइपरटेंशन और दिल से जुड़ी बीमारियों के खतरे को भी कम करने में सहायक हैं।मोटा अनाज कुपोषण से लड़ने में भी बहुत फायदेमंद होता है और ऊर्जा के साथ-साथ प्रोटीन से भी समृद्ध होते हैं।

 

किसान कर रहे फसल चक्र में परिवर्तन

किसानों को नुकसान से बचाने के लिए जिले में फसल चक्र का परिर्वतन किया गया है। जिले में प्राय: देखा जाता है कि किसान एक फसल पर ही निर्धारित हैं जिसके कारण उन्हे नुसान भी उठाना पड़ता है। जिले में फसलों को लेकर सबसे ज्यादा नुकसान पत्थलगांव विकासखंड के किसानो को उठाना पड़ता है। पिछले कई वर्षों से यहां किसानों के द्वारा टमाटर की फसल लेने और टमाटर की बम्पर पैदावार हो जाने से किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ा था। अब उस सीजन में किसान जब टमाटर के दाम ज्यादा नहीं मिलते उस समय मक्का और दलहन की खेती पर फोकस कर रहे है।

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